एक लाल टोपी, एक शरारती हवा और नन्हा गोलू
२–४ साल · ३ मिनट
एक धूल-धूसरित बादल, एक लंबी सूँड़ और छपाक-छपाक पानी
एक बड़े पेड़ की जड़, एक नन्हा हरा दरवाज़ा और ठक-ठक
एक भारी सूँड़, एक छिपी पूँछ और झूल-झूल
एक बड़ा पत्ता, एक नन्ही तितली और गोलू के दो बड़े कान
नींद नहीं आ रही थी… फिर एक जुगनू आया
३–५ साल · ४ मिनट
जंगल में रोशनी ढूँढने निकला एक छोटा-सा दोस्त
३–६ साल · ५ मिनट
एक झूलती डाल, एक बड़ी परछाईं और एक नन्हा दिल
एक खोखला पेड़, तीन नन्ही ताल और कोई भी छूटा नहीं
२–४ साल · ४ मिनट
एक छपाक, एक छोटी-सी गलती और एक प्यारा-सा सुधार
सुबह-सुबह घास पर हज़ारों नन्हे मोती चमक रहे थे
शाम की धूप में दीवार पर एक और हाथी दिखा — बिलकुल गोलू जैसा!
गोलू ने एक नन्हा बीज मिट्टी में बोया — और फिर इंतज़ार करना सीखा।
सबसे मीठा अमरूद सबसे ऊपर था — और गोलू सबसे नीचे।
गीली मिट्टी पर बड़े-बड़े निशान और एक नन्ही जासूसी
जब दोस्त की तबीयत ठीक न हो, तो खेल भी धीरे-धीरे होता है
एक ठंडी सुबह जंगल कहीं छिप गया था
एक झूला टूटा… और गोलू ने नया बनवा दिया
सबसे धीमा दोस्त भी नाव-दौड़ में शामिल
छिपाया हुआ सच रात भर नींद नहीं आने देता
कुछ चीज़ें छूने की नहीं, देखने की होती हैं
हिचकी अकेले नहीं गई — दोस्त के साथ चली गई
ज़ोर से नहीं… धीरे-से बजा
कुछ चीज़ें वहीं रहने पर सबसे प्यारी लगती हैं
जो हमें खट्टा लगे, किसी और को मीठा लग सकता है
किसी को चुप कराते-कराते अपना मन भी सो जाता है
कभी-कभी ढेर के नीचे कोई नन्हा दोस्त छिपा होता है
एक सिरा पकड़ा — और शाम तक नहीं छोड़ा
एक नन्ही घंटी, और एक बड़ा-सा दिल
पत्ते पर रखे जामुन — पर लाया कौन?
एक नन्ही आवाज़, जो हिलने पर चुप हो जाती है
एक नमस्ते, जो तीन बार ठीक से नहीं निकली
एक रज़ाई जो एक कान तक ही पहुँची
पानी भरा पत्ता, और बहुत सँभलकर रखे नन्हे क़दम
एक चिकनी ढलान, सर्र… और अपनी बारी का इंतज़ार
एक पंख, जो हर साँस पर उड़ जाता था
जो सबसे चुप रहेगा, वही जीतेगा
सबसे नरम चीज़, अपनी जगह पर
ध्यान से देखो, बात अपने-आप खुल जाती है
कुछ चीज़ें बस देखने के लिए होती हैं