गोलू और सूँ-सूँ वाला बाँस

हवा एक टूटे बाँस के छेद से निकलती है और सूँ-सूँ गाने लगती है। गोलू भी वैसा ही गाना बजाना चाहता है — पर ज़ोर से फूँकने पर सिर्फ़ धूल उड़ती है और बाँस लुढ़क जाता है। थककर बैठे गोलू को हवा ही रास्ता दिखा देती है: वह बहुत धीरे फूँकता है, और बाँस गा उठता है।

३ मिनट की कहानी

इस कहानी का दिल

गोलू सीखता है कि कुछ चीज़ें ज़ोर से नहीं, धीरे-से करने पर होती हैं।