गोलू और फिसलनी चट्टान
शाम की धूप में एक चिकनी ढलवाँ चट्टान पर चिक्की गिलहरी सर्र… करके फिसलती है। गोलू का मन भी मचल जाता है, पर वह इंतज़ार नहीं करता — और बीच ढलान पर अटक जाता है। चिक्की उसे धकेलकर नीचे उतारती है, और फिर दोनों बारी-बारी फिसलते हैं।
३ मिनट की कहानी






