गोलू और झींगुर का गाना

शाम को ठंडी घास में लेटे गोलू को कहीं से टीं… टीं… सुनाई देता है। वह जैसे ही आगे बढ़ता है, गाना चुप हो जाता है। ढूँढ़ते-ढूँढ़ते थककर गोलू बिलकुल शांत बैठ जाता है — और तब गाना खुद उसके पास आ जाता है।

३ मिनट की कहानी

इस कहानी का दिल

गोलू जान जाता है कि कुछ नन्ही आवाज़ें सिर्फ़ चुपचाप बैठने पर ही पास आती हैं।