गोलू और सुबह की सफ़ेद चादर

सुबह गोलू बाहर आया तो हर तरफ़ सफ़ेद कोहरा था — न पेड़, न तालाब, न रास्ता। उसने पुकारा, धीरे-धीरे क़दम बढ़ाए, खरगोश को पाया, और सूँड़ से छूकर वही बड़ा पेड़ ढूँढ लिया। फिर धूप आई और चादर उठ गई — सब कुछ वहीं था, बस चुपचाप छिपा था।

३ मिनट की कहानी

इस कहानी का दिल

नन्हे बच्चे को अनजानी, धुँधली चीज़ें अटपटी लगती हैं। यह कहानी बताती है कि जो दिख नहीं रहा, वह गया नहीं है — थोड़ा धीरज और थोड़ी छुअन से दुनिया लौट आती है।