गोलू और सुबह की सफ़ेद चादर
सुबह गोलू बाहर आया तो हर तरफ़ सफ़ेद कोहरा था — न पेड़, न तालाब, न रास्ता। उसने पुकारा, धीरे-धीरे क़दम बढ़ाए, खरगोश को पाया, और सूँड़ से छूकर वही बड़ा पेड़ ढूँढ लिया। फिर धूप आई और चादर उठ गई — सब कुछ वहीं था, बस चुपचाप छिपा था।
३ मिनट की कहानी






