गोलू और धूप का टुकड़ा

बारिश वाली रात के बाद सुबह ठंडी है और गोलू छाया में ठिठुर रहा है। चिक्की उसे अपनी नन्ही पत्ती की रज़ाई देती है, पर वह सिर्फ़ एक कान ढकती है। पत्ते जोड़े, हवा उड़ा ले गई — और तब गोलू को दीवार के पास धूप का एक सुनहरा टुकड़ा दिख जाता है।

३ मिनट की कहानी

इस कहानी का दिल

गोलू समझ जाता है कि हर गरमाहट अपने-अपने नाप की होती है, और धूप सबके लिए काफ़ी है।