गोलू और मखमली काई

बरगद के पीछे वाली गीली चट्टान पर गोलू को मखमल जैसी हरी काई मिलती है। वह उसका एक टुकड़ा अपनी सोने की जगह पर ले जाता है — पर वहाँ वह भुर-भुर होकर बिखर जाता है। चिक्की से समझकर गोलू काई को उसकी अपनी चट्टान पर लौटा देता है, और रोज़ साँझ को वहीं आराम करने आता है।

३ मिनट की कहानी

इस कहानी का दिल

कुछ प्यारी चीज़ें अपनी जगह पर ही सबसे सुंदर रहती हैं — उन्हें वहीं रहने देना भी प्यार है।