गोलू और नन्ही नमस्ते

बाँस के पीछे एक नन्ही हिरनी आकर रहने लगी है। गोलू उसे नमस्ते कहना चाहता है — पर पहली बार आवाज़ बहुत ज़ोर से निकलती है, दूसरी बार बहुत नन्ही, और तीसरी बार निकलती ही नहीं। थककर गोलू चुपचाप बैठ जाता है, और तब छुटकी खुद उसके पास आ जाती है।

३ मिनट की कहानी

इस कहानी का दिल

गोलू जान जाता है कि दोस्ती ज़ोर से कहने से नहीं, पास बैठ जाने से शुरू होती है।