गोलू और छलकता पत्ता
शाम के आँगन में छोटू कछुआ बहुत दूर से चलकर आता है, उसकी पीठ पर धूल जमी है। गोलू एक चौड़े पत्ते में कल की बारिश का पानी उठाता है — पर जल्दी में वह छलक जाता है। दूसरी बार गोलू साँस रोककर, धीरे… धीरे… नन्हे क़दम रखता है।
३ मिनट की कहानी






